सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ काल चितावनी को अग ॥ [ ३३ छीजत जाइ घटै दिन ही दिन, दीसत है घट कौ नित छेहा ॥ काल अचानक आइ गहै कर, ढाहि गिराइ करै तन खेहा । सुन्दर जानि इहै निहचै धरि, एक निरंजन सौ करि नेहा ॥६॥ तू कछु और बिचारत है नर, तेरौ बिचार धर्यौ ई रहैगौ । कोटि उपाइ करै धन कै हित, भाग लिख्यौ तितनौ ई लहैगौ ॥ भोर कि साझ घरी पल माझसु, काल अचानक आइ गहैगो । राम भज्यौ न कियौ कछु सुकृत, सुन्दर यौं पछताइ कहैगौ ॥७॥ भूल गयौ हरि नाम कौ तू, शठ, देखि धौं कौन सयोग बन्यौ है । काल अचानक आइ गहै कठ, पेखि धौं झूठौ सौ तानो तन्यौ है ॥ छार करै सब चामकौ लूटै, अनादि कौ ऐसे हि जीव हन्यौ है । कोऊ न होत सहाइ कौं कूटै, अनादि कौ मुन्दर यासी सन्यौ है ॥८॥