भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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३४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ बीत गये पिछले सबही दिन, आवत है अगिले दिन नेरे । काल महा बलवत बडौ रिपु, साधि रह्यौ सिर ऊपरि तेरे ॥ एक घरी महि मारि गिरावत, लागत ताहि कछू नहि बेरे । सुन्दर सत पुकारि कहैं सब, हू पुनि तोहि कहू अब टेरे ॥६॥ सोइ रह्यौ कहा गाफिल व्है करि, तो सिर ऊपर काल दहारे । धामस धूमस लागि रह्यौ शठ, आइ अचानक तोहि पछारे ॥ ज्यौं वन मैं मृग कूदत फादत, चित्रक लै नख सौ उर फारे । सुन्दर काल डरै जिहि के डर, ता प्रभुकौ कह क्यो न सभारे ॥१०॥ (१०) धामस धूमस-धूमधाम मे । चित्रक-चीता । (११) मूड ही मूड-सिर ही सिर । भराभर वाजे-आपस मे टकराते है, फूटने लगते है ।