भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

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४८ ] ।। सुन्दर विलास ।। देस देस ही के लोक आइकै हजूरि होहि, बैठि करि तखत कहावै सुलतान है । सुन्दर कहत जब चेतना सकति गई, उहै देह ताकी कोऊ मानत न आन है ॥११॥ ।। इति देहात्म बिछोह को अंग सम्पूर्णं ।। (११) तमास-तमाशा, अचम्भे की बात ।