भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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५६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ ॥ अथ अधीरज उराहनैं को अंग ॥६॥ इन्दव छंद पाव दिये चलनै फिरनै कोड, हाथ दिये हरि कृत्त करायौ । कान दिये सुनिये हरि को जस, नैन दीये तिनि माग दिखायौ ॥ नाक दीयौ मुख शोभत ता करि, जीभ दई हरि को गुन गायौ । सुन्दर साज दियौ परमेश्वर, पेट दियौ परि पाप लगायौ ॥१॥ कूप भरै अरु वापि भरै पुनि, ताल भरै बरखा रितु तीनौ । कोठि भरै घट माट भरै, घर हाट भरै सब ही भरि लीनौ ॥ खदक खास बुखार भरै परि, पेट भरै न बडौ दर दीनौ । सुन्दर रीतौ ही रीतौ रहै यह, कौन खडा परमेश्वर कीनौ ॥२॥ (१) अधीरज-अधीरता । उराहना-उलाहना, उपालभ देना । (२) वापि-बावडी । माट-बडा मटका । खदक-बडा गढ्ढा । खास-खाई । बुखार-भखारी । दर-गढ्ढा ।