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सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

२७२ (१८) परधन-श्रात्मानुभव । परनिन्दा अनात्म निवृत्ति । परधी-ईश्वर विश्वास । मास-ब्रह्मानन्द । मदिरा-श्रात्म चितन । अकर्म-निष्काम कर्म । कर्म-सकाम कर्म । (१६) बढई-गुरुदेव । चरखा-चित्त । बहू-ब्रह्मबुद्धि । सास-स्मृति । नैंन्हू तार-सहज समाधि । पूनी-स्वानुभूति । जुलाहा-जीवात्मा । ऊ ची जाति-ब्रह्म से एकता । (२०) कुमारी कन्या-गुरुज्ञानरहित बुद्धि । घर-घर फिरे-भटकती है । वेश्या-विषयासक्त । पतिव्रता-परमात्म परायण । एक पुरुष-परमात्मा । पापी-जितेन्द्रिय । धर्म- इन्द्रियासक्ति । (२१) विप्र-ज्ञानी संत । रसोई-भजनभाव । चौका- शम, यम, उपरति, तितिक्षा । लकड़ी-ध्यानवृत्ति । चूल्हा-चित्त । रोटी-नामरटन, जप । लकड़ी-ध्यान । तवा- मन । खिचरी-ब्रह्मबुद्धि । हुण्डिया-माया । आक धतूरा- कामक्रोधादि मनोविकार । (२२) बैल-कर्तृत्वाभिमानी जीव । उलटि-कर्तृत्वाभि मान छोडकर । नायक-मन बुद्धि को । लांद्यो-कर्तव्य सौंप दिया । सत्य-परमात्मा । सौदा-ब्रह्मप्राप्ति का । दिसतर- परदेश । नायकनी-बुद्धि ।

२७३ (२३) वनिक-व्यापारी, जीव । बनजी-व्यापार ईश्वर भक्ति का । तावडा-सुखदु;ख का । भली वस्तु-ईश्वर भजन, सत्कर्म । गठरिया बाधी-पुण्य की कमाई की । लेखा-जीवन का हिसाब । बरी-ब्रह्मरूपी वटवृक्ष । बैल अहकार । पूंजी- तत्त्वज्ञान की कमाई । (२४) पहरायत-पहरेदार व्यवहार बुद्धि । शाह-जीव । चोर-वैराग्य बुद्धि या रामनाम । कोतवाल-मन । राजा- अहकार या जीव । गाव-हृदय या ससार । शोर-प्रशंसा । प्रजा-दैवीगुण या मन, प्राण, इन्द्रिय । नगरी-शरीर । (२५) राजा-जीवात्मा । विपत्ति-सासारिक तृष्णाएं । घर घर-नाना योनि या इन्द्रिया । पाव-शुभाशुभ कर्म या सकल्प । घोडा-शरीर । बीख-मन की चाल । आक- इरड-संसार के विषय । सुख-रस । रसभरे ईख-ईश्वर भक्ति । (२६) पानी-ईश्वर प्रेम ; अग्नि-ब्रह्मज्ञान या विरह । (२७) खसम-जीव । जोरू-विषयलालसा या ब्राह्म वृत्ति । (२८) पथी-मुमुक्षुजीव, संत पुरुष । पंथ-ज्ञान भक्ति का मार्ग । निर्भय देश-अद्वैत ब्रह्मस्वरूप । दुष्काल-जन्म- मरण का चक्कर । सुभिक्ष-अखण्ड ब्रह्मानन्द । (२९) अहेरी-मुमुक्षु संत । वन-ससार या शरीर । शिकार-मन पर विजय या ब्रह्मप्राप्ति । सिंह व्याघ्र मृग-

२७४ काम क्रोध लोभादि । राजा-राम, परमात्मा । धनुष-ध्यान या रामनाम । कमर-हृदय । तरकस-बाण, विचार । सावज- शिकार, मन । जुहार-निवेदन, अर्पण । (३०) शुक-ज्ञानी गुरुदेव । कोकिल-कोयल, विचार- वान पुरुष । सारस-अविवेकी व्यक्ति । हंस-विवेकी जन । मुक्ताफल-गूढ, सार अर्थ । मानसरोवर-हृदय । न्हाहि-प्रसन्न होते है । करक-दोष । (३१) द्विज-ब्राह्मण, जीव । भ्रष्टक्रिया-सांसारिक भोगविलास । ठोर-परमपद, परमानन्द ।

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