सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७२ (१८) परधन-श्रात्मानुभव । परनिन्दा अनात्म निवृत्ति । परधी-ईश्वर विश्वास । मास-ब्रह्मानन्द । मदिरा-श्रात्म चितन । अकर्म-निष्काम कर्म । कर्म-सकाम कर्म । (१६) बढई-गुरुदेव । चरखा-चित्त । बहू-ब्रह्मबुद्धि । सास-स्मृति । नैंन्हू तार-सहज समाधि । पूनी-स्वानुभूति । जुलाहा-जीवात्मा । ऊ ची जाति-ब्रह्म से एकता । (२०) कुमारी कन्या-गुरुज्ञानरहित बुद्धि । घर-घर फिरे-भटकती है । वेश्या-विषयासक्त । पतिव्रता-परमात्म परायण । एक पुरुष-परमात्मा । पापी-जितेन्द्रिय । धर्म- इन्द्रियासक्ति । (२१) विप्र-ज्ञानी संत । रसोई-भजनभाव । चौका- शम, यम, उपरति, तितिक्षा । लकड़ी-ध्यानवृत्ति । चूल्हा-चित्त । रोटी-नामरटन, जप । लकड़ी-ध्यान । तवा- मन । खिचरी-ब्रह्मबुद्धि । हुण्डिया-माया । आक धतूरा- कामक्रोधादि मनोविकार । (२२) बैल-कर्तृत्वाभिमानी जीव । उलटि-कर्तृत्वाभि मान छोडकर । नायक-मन बुद्धि को । लांद्यो-कर्तव्य सौंप दिया । सत्य-परमात्मा । सौदा-ब्रह्मप्राप्ति का । दिसतर- परदेश । नायकनी-बुद्धि ।