सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७१ (१३) वाडी-कर्म । माली-जीव । हाली-मन । खेत-शरीर । हस-जीवात्मा । श्यामरग-प्रभु प्रेम । भ्रमर-मन । शशिहरि-चन्द्रमा, मन । राहु-रजोगुण तमोगुण । सूर-ज्ञान का सूर्य । केतु-अज्ञान । सगुरा-सगुण ससार । निगुरा-निर्गुण ब्रह्म । (१४) अग्नि-विरहाग्नि । लकडी-प्रभु प्राप्ति की लालसा ! पानी-ध्यान । घीव-प्रभुदर्शन । (१५) पात्र-शुद्ध हृदय । झोली-सात्विक विचार । योगी-जिज्ञासु । भिक्षा-ब्रह्मानुभव । जगत-ससारी जन । जागे-प्रवृत्ति मे रहे । गोरख-सतजन । सोवे-समाधि लगावे । भिक्षा-ब्रह्मानुभूति । (१६) निदंयी-निर्मोही । पशुघातक-इन्द्रियसयमी । दयावत-इन्द्रियासक्त । लोभी-जिज्ञासु । निर्लोभी-ईश्वर विमुख । मिथ्यावादी-जगत को मिथ्या मानने वाला । सत्य कहे-जगत को सत्य समझने वाला । धूप-आत्म ज्ञान । शीतलता-शान्ति । (१७) माई-मोहमाया । वाप-देहाध्यास । उमदानी- उमगती हुई । धी-बुद्धि । खसम-पति, परमेश्वर । बहू विचारी-विचारशील बुद्धि । बखतावर-शिक्षक । सास- मनोवृत्ति । भाई-ब्रह्मज्ञान । कुटुम्ब-वासना, ससार ।