भारतकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

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षोडशः सर्गः कालेऽथ शुद्धिमति शूरजनः समृद्धान् पत्नीसु तासु तनयान् जनयाञ्चकार । तेषामभूदधिगुणः किल भोजदेवः प्रासूत पट्टमहिषी कनकावती यम् ।। १ ।। राव सुर्जन ने शुद्ध और शुभ मुहूर्त में अपनी पत्नियों में समृद्ध पुत्र उत्पन्न किये जिनमें पटरानी कनकावती के पुत्र भोजदेव सबसे अधिक गुणवान् थे ।। १ ।। आरुह्य वाजिवरमूर्जितमाजिभूमौ नाराचराजिभिरुपार्जितजैत्रवीर्यः । जाग्रत्प्रगल्भभुजमण्डनमण्डलाग्रव्यग्रीकृतोप्रतरवैरिनृपालवर्गः ।। २ ।। भोजदेव उन्नत और श्रेष्ठ घोड़े पर चढ़ कर युद्ध भूमि में अपनी बाण परम्परा के द्वारा अपने उत्कृष्ट बल को प्रकट करके विजय प्राप्त करते थे और अपनी जागरूक तथा गंभीर भुजाओं को सुशोभित करने वाली तलवार से भयंकर शत्रु राजाओं के समूह को उद्विग्न कर देते थे ॥२॥ संख्येबु यः प्रतिभटक्षितिपालवक्षोविक्षोभजातरुधिरोद्धुरकर्दमाक्तम् । कौक्षेयकं खलु विपक्षम