सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)
Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary
कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा
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१७८ सुर्जनचरितमहाकाव्यम् इतिरचितविहारः पार्थिवः प्रेयसोभिः पयसि ललितलीलापेशलाभिः परीतः । करधृतविशदस्रग्गन्धसाराम्बराभिः परिजनवनिताभिः सेवितं तीरमागात् ॥८०॥ ललित लीला में निपुण प्रेयसियों से घिरे हुये राजा वारिविहार करके नदी के तीर पर चले आये जहाँ परिचारिकायें हाथों में सुन्दर मालायें, चन्दन और वस्त्र लिये खड़ी थीं ॥ ८० ॥ इति सुर्जनचरितमहाकाव्ये पञ्चदशः सर्गः।