भारतकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

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CC0. In Public Domain, Digitizagtion by eGangotri विंशतितमः सर्गः २२३ धाराऽथ वारां विशदाऽस्य मूर्ध्नि व्यरोचत स्फाटिककुम्भमुक्ता। पीयूषधारा मिहिकामयूखबिम्बात् पतन्तीव नगेशशृङ्गे ॥२१॥ अभिषेक के समय भोज के ऊपर स्वर्णकलश से गिरने वाली पवित्र जलधारा, हिमालय के शिखर पर चन्द्रविम्ब से गिरने वाली पीयूषधारा (किरणपुञ्ज की अमृत के समान शीतल और सुखद प्रकाश धारा) के समान सुशोभित हो रही थी ॥२१॥ तस्याऽभिषेकप्रभवानि तानि तोयानि शीतानि तनौ धृतानि। व्यसर्जयन् सूर्जनविप्रयोगजन्मानमुग्रं परितापमुर्व्याम् ॥२२॥ अभिषेक के समय भोज के शरीर पर गिरने वाले उन शीतल जलों ने पृथ्वी के, राव सूर्जन के वियोग से उत्पन्न, तीव्र सन्ताप को मिटा दिया ॥२२॥ मनोऽनुकूले कुलवर्धनोऽसौ शुद्धे दुकूले विशदे वसानः। राजश्रियो लोचनलोभनीयमाशिश्रिये मण्डनमुच्छ्रितश्रीः ॥२३॥ उत्कृष्ट शोभा वाले कुलवर्धन राजकुमार भोज ने मन के अनुकूल शुद्ध और स्वच्छ वस्त्र धारण किये और फिर राज्यलक्ष्मी के नेत्रों को लुभाने वाले आभूषण पहिने ॥२३॥ यत्तर्जनीसङ्गविशेषिताऽसौ विशेषकश्रीर्नवनायकस्य। अतो बभूवाऽस्य विपक्षलक्ष्म्याः किल तर्जनी सा ॥२४॥ नये राजा राव भो[ज की ...] [त]र्जनी (अंगूठे के पास की उँगली) से राजतिलक किया गया उसकी शोभा [...] के लिये तर्जनी (धमकाने वाली) बन गई ॥२४॥ [..] गोरोचनाकुङ्कु[म ...] विशाले तिलकः कृतो यः। [स] एव मन्ये मनुजाधिपेऽस्मिन् जनानुरागाङ्कुरतां जगाहे ॥२५॥ राव भोज के विशाल ललाट पर जो गोरोचन और केसर से रंगीन लम्बा राजतिलक किया गया मान[हुँ] इस राजा में प्रजा के अनुराग का अंकुर बन गया ॥२५॥ [.. दूर्वा]ङ्कुरचारुगुच्छं मङ्गल्यमेकं स निजोत्तमाङ्गे। [...]ङ्कुराणि हर्म्याणि हन्त द्विषतामभूवन् ॥२६॥ [भोज] ने अपन[..] पर दूर्वादल (कुश) का एक सुन्दर और मांगलिक गुच्छा धारण किया, किन्तु उसके [शत्रु] राजाओं के महलों में बड़े बड़े दूर्वांकुर (दूब, कुश आदि घास फूस) उग गये अर्थात् [..]य से, अपने महल छोड़ कर, भाग गये और शून्य महलों में घास फूस उग गये [...] [...] भद्रकरः प्रजानां पट्टाम्बरस्रस्तरमारुरोह। सौ[...] भृतधातुरागं तमोपनोदाय मयूखमाली ॥२७॥ सुन[...] और प्रजा से कोमल कर लेने वाले उदीयमान राव भोज रेशमी वस्त्रों से सुसज्जित [...] पर प्रजा के दुःख रूपी अन्धकार को दूर करने के लिये, गेरु आदि धातुओं से सुशोभित उदयाचल पर्वत पर अन्धकार को नष्ट करने के लिये उदीयमान कोमल किरणों वाले सूर्य के समान, आरूढ़ हुये ॥२७॥ (२३) मण्डनमाभूषणम्। Dr. Urmila Sharma Collection, Varanasi