सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ
पृष्ठ 9, कुल 359 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 9
पंचम संस्करण स्वर्गीय डॉ० धीरेन्द्र वर्मा द्वारा सम्पादित सूरसागर सार (सटीक) का यह पंचम संस्करण मुद्रित हो रहा है। इसके तृतीय संस्करण में टीकागत् अशुद्धियों और मुद्रण-जन्य अनेक दोषों को पं० उमाशंकर शुक्ल के आदेश से डॉ० किशोरी लाल, श्री रामकिशोर ने दूर कर दिया था, किन्तु खेद है कि ग्रन्थ के चतुर्थ संस्करण के प्रकाशित होते-होते शुक्ल जी का निधन हो गया। अतः चतुर्थ संस्करण उनके दिवंगत हो जाने के उपरान्त प्रकाशित हुआ, फिर भी शुक्ल जी की शैली के अनुसार व सभी रह जाने वाली त्रुटियों को इस संस्करण मे यथाशक्य दूर करने की पूर्ण चेष्टा की गई है। अब आशा है कि सूरकाव्य के सभी पाठकों के लिए यह अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी एवं लाभप्रद सिद्ध होगा। —प्रकाशक