सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)

सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
DevanagariBrajpublished359 पृष्ठ
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रह गए हों आश्चर्य नहीं। कुछ स्थलों के अनुवाद के सम्बन्ध में मतभेद हो सकता है यह स्वाभाविक है। इन त्रुटियों के दूर करने के सम्बन्ध में सुझावों का मैं स्वागत -करूँगा। संग्रह के प्रकाशक साहित्य भवन (प्रा०) लिमिटेड को मैंने सलाह दी है कि मूल 'सूरसागर सार' का संस्करण भी छपवाये। यह सटीक संस्करण अतिरिक्त विशेष संस्करण के रूप में प्रकाशित करें । परिशिष्टों में परिशिष्ट (ग)—'शब्दार्थ' को सटीक संस्करण में अनावश्यक समझ कर छोड़ दिया गया है। शेष दो परिशिष्ट, अर्थात् परिशिष्ट (क)— रामचरित' तथा परिशिष्ट (ख)—'अंतर्कथाएँ' रहने दिए गए हैं। संग्रह के अन्त में मूल 'सूरसागर-सार' के समस्त पदों की अनुक्रमणी भी दी गई है। प्रयाग दीपावली, सं० २०२६ वि० । — धीरेन्द्र वर्मा