सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्पष्टाधिकार १०३ दिखाई पड़ता है और जब उसकी दूरी १४° रहती है तभी छिप जाता है । शुक्र भी भीतरी युति के समय सबसे बड़ा दीखता है और बाहरी युति के समय सबसे छोटा । इससे सिद्ध हो गया होगा कि ग्रह अस्त होने के पीछे कहीं चले नहीं जाते वरन् सूर्य के इतने पास हो जाते हैं कि आंख से दिखाई नहीं पड़ते । हाँ दूरबीन से यह सूर्य के चाहे जितने पास हों दिखाई पड़ सकते हैं। बुध और शुक्र दोनों ग्रहों की कक्षाएँ पृथ्वी की कक्षा के भीतर हैं इसलिए जो बात बुध के लिए कही गयी है वह शुक्र के लिए भी लागू है । अन्तर केवल इतना है कि शुक्र की कक्षा बुध की कक्षा से बड़ी है इसलिए भीतरी युति के समय शुक्र पृथ्वी से अत्यन्त निकट हो जाता है। दूरबीन से देखने पर बुध और शुक्र दोनों में उसी प्रकार कलायें दिखाई पड़ती हैं जैसी चन्द्रमा में बाहरी युति के समय दोनों ग्रह पूर्ण गोल दीखते हैं, क्योंकि उस समय पूरा प्रकाशित बिम्ब हमारे सामने रहता है। जब ग्रह कुछ बगल में हो जाता है तब पूरा प्रकाशित भाग हम लोगों को नहीं दीखता, दिन-दिन बिम्ब कुछ खंडित होता जाता है। परन्तु प्रकाश अधिक मिलता है, क्योकि दूरी कम होती जाती है इसलिए खंडित ग्रह भी पास होने के कारण अधिक प्रकाश देता है। भीतरी युति के समय ग्रह का प्रकाशित भाग सूर्य की ओर होता है इसलिए हमको ग्रह से ज़रा भी प्रकाश नहीं मिलता और वह एक काले धब्बे की तरह दूरबीन में दिखाई पड़ता है । शुक्र की कलायें चित्र २२ में दिखाई गई हैं। चित्र २३ में राशि-चक्र का केवल वह भाग दिखाया गया है जहाँ मंगल वक्री और फिर मार्गी होता हुआ जान पड़ता है । स सूर्य केन्द्र में है । पृथ्वी अपनी कक्षा में और मंगल अपनी कक्षा में सूर्य की परिक्रमा इस प्रकार करते हैं कि वह राशि चक्र में मेष से वृष, वृष से मिथुन में जाते हुये (सूर्य से) दिखाई देते हैं । सूर्य में स्थित मनुष्य को कोई ग्रह वक्री होते हुये नहीं दीख सकते; उसे सब ग्रह एक ही तरफ से परिक्रमा करते हुये देख पड़ते हैं । हाँ पृथ्वी निवासियों को मंगल मार्गी, शीघ्रगामी, मन्दगामी, स्थिर तथा वक्री, मन्द गामी, फिर मार्गी दिखाई पड़ता है । मंगल की एक परिक्रमा ६८६ दिन में पूरी होती है इसलिए १०° की परिक्रमा वह ६८६ × १० / ३६० दिन वा १६ दिन में कर लेता है और इतने समय में पृथ्वी १६° के लगभग चलती है, क्योंकि पृथ्वी की एक परिक्रमा ३६५ दिन में पूरी होती है अर्थात् १ दिन में प्रायः १° परिक्रमा होती है । मान लीजिये पृथ्वी अपनी कक्षा में विन्दु १ पर है और मंगल भी अपनी कक्षा में विन्दु १ पर है तब पृथ्वी निवासियों को मंगल राशि चक्र में १ विन्दु पर