भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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१७० सूर्य-सिद्धान्त यदि फि (उ)=उ तो फि (म)=म और फि' (म)=१ ∴ उ=म+ च. ज्याम. १ + $\frac{च^२}{\vert २}$ $\frac{ता}{ताम}$ { [ज्याम].१$^२$ }

  • $\frac{च^३}{\vert ३} \cdot \frac{ता^२}{ताम^२}$ { (ज्याम)$^३$ } + $\frac{च^४}{\vert ४} \cdot \frac{ता^३}{ताम^३}$ { [ज्याम]$^४$ . १ }
  • $\frac{च^५}{\vert ५} \cdot \frac{ता^४}{ताप^४}$ { [ज्याम]$^५$ . १ } + $\frac{च^६}{\vert ६} \cdot \frac{ता^५}{ताम^५}$ { [ज्याम]$^६$ . १ } + ... इत्यादि

लोनी की त्रिकोणमिति भाग २ के अनुसार ज्या म के किसी घात (ज्या म)$^न$ का विस्तार यदि न सम है तो यह होगा :- ज्या$^न$म= $\frac{१}{२^{न-१} \times (-१)^{\frac{न}{२}}}$ { कोज्या नम - नकोज्या (न - २)म

  • $\frac{न (न-१)}{\vert २}$ कोज्या (न - ४) म - $\frac{न (न-१) (न-२)}{\vert ३}$ कोज्या (न - ६)म
  • ......इत्यादि}

यदि न विषम हो तो, ज्या$^न$म= $\frac{१}{२^{न-१} (-१)^{\frac{न-१}{२}}}$ { ज्यानम - नज्या (न - २)म

  • $\frac{न (न-१)}{\vert २}$ ज्या (न - ४) म - $\frac{न (न-१) (न-२)}{\vert ३}$ ज्या (न - ६) म + ......... इत्यादि }

∴ $\frac{ता}{ताम}$ { [ज्या म]$^२$ } = $\frac{ता}{ताम}$ ($\frac{१ - कोज्या २म}{२}$) = ज्या २म, $\frac{ता^२}{ताम^२}$ (ज्या$^३$म) = $\frac{ता^२}{ताम^२}$ ($\frac{३ज्याम - ज्या ३म}{४}$) = $\frac{६ज्या ३म - ३ज्याम}{४}$ = $\frac{३}{७}$ (३ज्या ३म - ज्याम)