भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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परिचय : स्वर्गीय महाबीर प्रसाद श्रीवास्तव का जन्म कार्तिक शुक्ल २ संवत् १९४४ वि० तदनुसार १८ अक्टूबर, १८८७ में ग्राम बिझौली तहसील हँडिया, जिला इलाहाबाद में हुआ। इलाहाबाद के ही कायस्थ पाठशाला से हाईस्कूल (१९०६) तथा इन्टर परीक्षाएं (१९०८) और म्योर कालेज से बी० एस-सी० परीक्षा (१९१०) उत्तीर्ण की। आर्थिक स्थिति ठीक न होने से नौकरी कर ली। सं० १९७६ वि० के कार्तिक मास से 'सूर्य-सिद्धान्त' का 'विज्ञानभाष्य' लिखना प्रारम्भ किया जो विज्ञान परिषद् की मासिक पत्रिका में लगातार छपता रहा। यह भाष्य सं० १९८७ वि० में समाप्त हुआ। विज्ञान परिषद् ने इसे दो भागों में पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया था। इस ग्रंथ पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक तथा चुन्नूलाल पुरस्कार प्राप्त हुए। इस ग्रंथ का प्रथम संस्करण समाप्त हो जाने पर पाठकों के सतत अनुरोध पर इसे पुनः प्रकाशित किया जा रहा है। अपनी कोटि की 'विज्ञान भाष्य' टीका से युक्त यह ग्रंथ 'सूर्य- सिद्धान्त' प्राचीन भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि एवं हिन्दी का एक गौरव ग्रंथ है। 'सूर्य-सिद्धान्त' समस्त पुस्तकालयों एवं जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी एवं संग्रहणीय है।

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