भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 287

२६४ सूर्य-सिद्धान्त इस रीति से पलभा का मान निकालने में बहुत गुणा भाग करना पड़ता है । इसलिए यदि स्पर्शरेखाओं की सारिणी बना ली जाय तो यह काम सहज ही हो सकता है क्योंकि अक्षांश और लम्बांश पूरक कोण हैं इसलिए अक्ष ज्या / लम्ब ज्या = अक्षांश स्पर्शरेखा, पलभा = १२ × अक्षांश स्पर्शरेखा (२) यही बात पृष्ठ २०५ में भी दिखलायी गयी है । उदाहरण—प्रयाग का अक्षांश २५° २५' है तो प्रयाग की पलभा क्या होगी ? (१) सूर्य-सिद्धान्त की रीति से अक्षज्या = २५° २५' की ज्या = १४७४' ∴ लम्बज्या = √ त्रिज्या२ - अक्षज्या२ = √ ३४३८२ - १४७४२ = √ (३४३८ + १४७४) (३४३८ - १४७४) = √ ४९१२ × १६६४ = ३१०६' पलभा = (अक्षज्या × १२) / लम्बज्या = (१४७४ × १२) / ३१०६ = ५.६६ अंगुल (२) नवीन रीति से— पलभा = १२ × अक्षांश स्पर्शरेखा = १२ × स्परे* २५° २५' = १२ × ०.४७५२ अंगुल = ५.७०२४ अंगुल = ५.७ अंगुल


  • स्पर्शरेखा की जगह सरलता के लिए स्परे लिखा गया है जैसे कोटिज्या के लिए कोज्या लिखा जाता है ।