भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२७० सूर्य-सिद्धान्त यदि स्पर्शरेखा की सारिणी से काम लिया जाय तो इसका सरल रूप यह होगा— छाया = १२ × स्परे (न) (४) ऊपर के समीकरण (ख) से सिद्ध है कि छायाकर्ण = शंकु / नतांश कोटिज्या वर्तमान प्रथानुसार यदि नतांश कोटिज्या का मान भारतीय प्रथानुसार लिखा जाय तो छायाकर्ण = शंकु × त्रिज्या / नतांश कोटिज्या अथवा छायाकर्ण = १२ × त्रिज्या / कोज्या (न) उदाहरण—किसी दिन सूर्य की उत्तर क्रान्ति १५°२५' और प्रयाग का अक्षांश २५°२५' है तो प्रयाग में इस दिन मध्याह्नकाल में छाया और छायाकर्ण क्या होंगे ? [देखो १४-१५ श्लोक का उदाहरण] प्रयाग उत्तर गोल में है, इसलिए इसके अक्षांश की दिशा श्लोकों के नियम के अनुसार दखिन है और क्रान्ति की दिशा उत्तर है इसलिए इन दोनों का अंतर ही सूर्य का नतांश होगा । ∵ न = २५°२५' - १५°२५' = १०° (१) सिद्धान्त की रीति से :— छाया = ज्या (न) × १२ / कोज्या (न) = ज्या १०° × १२ / कोज्या १०° = ५६७ × १२ / ३३८४ = २.१२ अंगुल छायाकर्ण = १२ × त्रिज्या / नतांश कोटिज्या = १२ × ३४३८ / ३३८४ = १२.१६ अंगुल