सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 316, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार २६३ = ज्या १५° X ५.७ X ३४३८ १२ X कोज्या १५° = ८६० X ५.७ X ३४३८ १२ X ३३२१ = ४३८ परन्तु अन्त्या = त्रिज्या +- चरज्या ∴ अन्त्या = ३४३८ +- ४३८ = ३८७६ या ३००० नतकाल = ३ घंटा ३० मिनट = ५२° ३० नतोत्क्रम ज्या = उत्ज्या ५२° ३०' = १३४५ ∴ छेद = (३८७६ - १३४५) X ३३२१ / ३४३८ या (३००० - १३४५) X ३३२१ / ३४३८ = २५३१ X ३३२१ / ३४३८ अथवा १६५५ X ३३२१ / ३४३८ ∴ शंकु = छेद X लम्बज्या / त्रिज्या = २५३१ X ३३२१ X ३१०६ / ३४३८ X ३४३८ अथवा १६५५ X ३३२१ X ३१०६ / ३४३८ X ३४३८ = २२०६ अथवा १४४४ परन्तु यहाँ शंकु उन्नतांश की ज्या के लिए प्रयुक्त है । इसलिए जब सूर्य उत्तर गोल में होगा तब इष्टकाल में उन्नतांश की ज्या २२०६ कला और जब सूर्य दक्षिण गोल में होगा तब उन्नतांश की ज्या १४४४ कला होगी । इसलिए पहली दशा में- उन्नतांश = ४०° और नतांश = ६०° - ४०° = ५०° और दूसरी दशा में उन्नतांश = २४° ५२' और नतांश = १५°८' पहली दशा में दृग्ज्या = √त्रिज्या^२ - शंकु^२ = √११८१६८४४ - २२०६^२ = √११८१६८४४ - ४८७६६८१ = √६६४ १६३ = २५३४