भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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त्रिप्रश्नाधिकार ३१५ चित्र ६२ यह चित्र ५६, ६० चित्रों के समान है अन्तर केवल इतना है कि यहाँ श शरद का सम्पात का स्थान है जहाँ से क्रान्तिवृत्त विषुवद्वृत्त के दखिन हो जाता है। का च ध क्रान्तिवृत्त के का विन्दु का ध्रुवप्रोतवृत्त । चरांश च पू का मान जानने के लिए समकोण गोलीय त्रिभुज पू च का से काम लेना चाहिए जिसमें च का का विन्दु की दक्षिण क्रान्ति है। यह ११°२६′ के समान होती है जब शका ३०° के समान होता है। च पू का कोण विषुवद्वृत्त और क्षितिजवृत्त के बीच का कोण है जो प्रयाग के लम्बांश के समान होता है (देखो पृ० २५७) इसलिये नेपियर के नियम के अनुसार ज्या (च पू) = स्परे (च का) x कोस्परे (च पू का) = स्परे ११°२६′ x कोस्परे (६०° - २५°२५′) = स्परे ११°२६ x स्परे २५°२५′ = .०६६६ ∴ च पू = ५°३३′ = ३३३′ [देखो पृष्ठ ३०६] इसलिए श पू = १६७४.५ + ३३३ = २००८ कला

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