सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 348, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३२५ इसलिए इष्टकाल में तुला राशि २१ पल तक उदय हो चुकी है और ५ घड़ी २१ पल तक और उदय होगी क्योंकि तुला का उदय काल प्रयाग में ५ घड़ी ४२ पल है। इसलिए इष्टकाल में तुला राशि पूर्व क्षितिज में लगी हुई है अर्थात् लग्न है। यह जानने के लिए कि तुला का कौन बिन्दु लग्न है फिर अनुपात से काम लेना होगा। क्योंकि जब ५ घड़ी ४२ पल अर्थात् ३४२ पल में तुला के ३० अंश उदय होते हैं तब २१ पल में कितने उदय हो चुकेेंगे। ३४२ : २१ : : ३० : तुला का गतांश ∴ तुला का गतांश = $\frac{२१\times३०}{३४२}$ = १°५०′३१″ = १°५१′ ∴ सूर्योदय से १६ घड़ी १५ पल पर ६रा १°५१′ लग्न है। यहाँ १°५१′ उदित राशियों में जोड़ा गया है। २री रीति— यदि यह जानना हो कि सूर्योदय से ५२ घड़ी १० पल पर क्या लग्न है तो अगले दिन के सूर्योदय के गतांश से काम लेने में अधिक सुविधा होगी। इष्टकाल से अगले सूर्योदय का समय = ६० घड़ी - ५२ घड़ी १० पल = ७ घड़ी ५० पल अगले सूर्योदय काल में सूर्य का निरयन भोगांश = ३रा ५°१′६″ + ५७′२१″ = ३रा ५°५८′२७″ ६० घड़ी में सूर्य की गति = ५७′२१″ ∵ ७३⁄४ ,, ,, = ७′१०′′८′′′ २० पल में ,, = १६′′७′′′ ∴ ७ घड़ी ५० पल में ,, = ७′२६″ ∴ इष्टकाल में सूर्य का निरयन भोगांश = ३रा ५°५८′२७″ - ७′२६″ = ३रा ५°५१′ ∴ इष्टकाल में कर्क राशि में सूर्य का गतांश ५°५१′ = ३५१′ इसलिए पहले की तरह गतासु = $\frac{३५१\times२०७५}{१८००}$