भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 358

विप्रश्नाधिकार ३३५ ∴ सूर्य का भुक्तांश = ५° ५८' = ३५८' लग्न का भोग्यांश = ३०° - २२°५६' = ७° १' = ४२१' सूर्य के भुक्तासु = ३५८ × २०७५ / १८०० = ४१३ = ६६ पल लग्न का भोग्य काल = ४२१ × २६१ / १८०० पल = ६८ पल ∴ सूर्य का भुक्तकाल और लग्न का भोग्यकाल = ६६ + ६८ पल = २ घड़ी १७ पल सूर्य और लग्न के बीच मिथुन राशि का उदयकाल = ५ घड़ी ३५ पल दोनों का योग = ७ घड़ी ५२ पल इसलिए सूर्योदय होने में ७ घड़ी ५२ पल रह गया है। लग्न से समय जानने की रीति तभी व्यवहार में लायी जा सकती है जब राशि और नक्षत्रों की पहचान अच्छी तरह हो । इसलिए यह आवश्यक है कि राशि, नक्षत्र तथा अन्य प्रसिद्ध तारों की पूरी जानकारी हो । सूर्य-सिद्धान्त के नक्षत्र ग्रह युत्यधिकार नामक ८वें अध्याय में कुछ नक्षत्रों और तारों की चर्चा है इसलिए वहीं यह भी बतलाया जायगा कि प्रसिद्ध प्रसिद्ध तारे कौन हैं जिनसे राशि में समय का ज्ञान सहज ही हो सकता है । यहाँ केवल यह बतला देना पर्याप्त है कि मध्य लग्न से समय जानने में अधिक सुविधा होती है । यदि यह मालूम हो कि मध्याह्न काल में सूर्य का विषुवांश क्या था और रात्रि में कौन तारा जिसका विषुवांश ज्ञात है यामोत्तर वृत्त पर है तो यह सहज ही जाना जा सकता है कि मध्याह्न से कितना समय बीता है क्योंकि तारा के विषुवांश से सूर्य के विषुवांश को घटाने पर जो अन्तर कलाओं में होता है उतने ही असुओं में वह तारा मध्याह्न के उपरान्त यामोत्तर वृत्त पर आता है । यदि किसी तारे का विषुवांश न ज्ञात हो तो केवल क्रान्तिवृत्त के तारा- समूहों को पहचान लेने से भी समय का स्थूल ज्ञान हो सकता है । इसके लिए सूर्य किस नक्षत्र पर है यह भी जानना आवश्यक होता है । यह तो पहले ही कहा जा चुका है कि क्रान्तिवृत्त के २७वें भाग को नक्षत्र कहते हैं और पूरा क्रान्तिवृत्त एक