सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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३८८ सूर्य-सिद्धान्त
- उदाहरण १—यदि शुक्र का क्षितिज लंबन ३०″ हो तो जिस समय इसका यथार्थ नतांश ६०° होगा उस समय इसका लंबन क्या होगा ? ला = ल ज्या न = ३०″ X ज्या ६०° = ३०″ X .८६६ = २५″.९८ उदाहरण २—यदि सूर्य का क्षितिज लम्बन ८″.६ हो तो जिस समय इसका यथार्थ उन्नतांश १६° होगा उस समय इसका लम्बन क्या होगा ? सूर्य का यथार्थ नतांश = ९०° - १६° = ७४° ला = ल ज्या न = ८″.६ X ज्या ७४° = ८″.६ X .९६१३ = ८″.२७ उदाहरण ३—यदि चन्द्रमा का क्षितिज लम्बन ६०′ ४१″.५ हो तो उसका लम्बन क्या है जब कि उसका स्पष्ट नतांश ८०° १६′ १६″ हो ? यहाँ चन्द्रमा का स्पष्ट नतांश दिया हुआ है इसलिए पहले सूत्र से काम लेना होगा । इसलिए ज्या ला = ज्या ल X ज्या ना = ज्या ६०′ ४१″.५ X ज्या ८०° १६′ १६″ गुणा भाग की क्रिया को कम करने के लिए इन कोणों की लघुरिक्थ सम्बन्धी ज्या (logarithmic sines) से काम लेना अच्छा होगा । लघुरिक्थ सम्बन्धी ज्या, कोज्या, स्पर्शरेखा को संक्षेप में लरि ज्या, लरि कोज्या और लरि स्परे लिखा जायगा । लरि ज्या ६०′ ४१″.५ = ८.२४६८३३ लरि ज्या ८०° १६′ १६″ = ९.९९३७७५ योग = ८.२४०६०८ ∴ लरि ज्या ला = ८.२४०६०८ और ला = ५६′ ४६″.६७ उदाहरण ४—यदि चन्द्रमा का क्षितिज लम्बन ६०′ ४१″.५ हो और उसका यथार्थ नतांश ७६° १६′ २६″.३३ हो तो उसका लम्बन क्या होगा ?
- लम्बन के सम्बन्ध में जितने उदाहरण लिखे गये हैं वे सब Loomi's Practical Astronomy से लिये गये हैं ।