भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 425

४०२ सूर्य-सिद्धान्त इसलिए ज्या लु ज्या लि ज्या आ स्परे का —————————— = —————— — ————— कोज्या क कोज्या का कोज्या क ज्या घा ज्या लि कोज्या आ ज्या घा ली × —————————— × कोज्या ( घ + —— ) कोज्या क कोज्या ली २ — २ यदि दोनों पक्षों को कोज्या क कोज्या का से गुणा कर दिया जाय और सरल किया जाय तो ज्या लु = ज्या लि ज्या आ कोज्या का ली ज्या लि कोज्या आ कोज्या ( घ + —— ) ज्या का (क) २

  • —————————————————— ली कोज्या —— २ मान लो कि ली कोज्या ( घ + —— ) कोस्परे आ २ कोस्परे फ = —————————————— ली कोज्या —— २ तब ज्या लु = ज्या लि ज्या आ कोज्या का — ज्या लि ज्या आ ज्या का कोस्परे फ इसलिए ज्या लु = ज्या त्रिज्या आ ( कोज्या का — ज्या का कोस्परे फ ) ⎛ कोज्या का ज्या फ — ज्या का कोज्या फ ⎞ = ज्या लि ज्या आ ⎜ —————————————————— ⎟ ⎝ ज्या फ ⎠ ज्या लि ज्या आ = ——————— ज्या ( फ — का ) ज्या फ ज्या लि ज्या आ यदि ——————— के लिए ब मान लिया जाय तो ज्या फ ज्या लु = ब ज्या ( फ — का ) परन्तु क — का = शु ∵ का = क — लु ∴ ज्या लु = ब ज्या ( फ — क + लु ) (२) = ब { ज्या (फ — क) कोज्या लु + कोज्या (फ — क) ज्या लु }