सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशक डा० रत्नकुमारी स्वाध्याय संस्थान विज्ञान परिषद् भवन महर्षि दयानन्द मार्ग इलाहाबाद-२११००२ फोन नं० ५४४१३ प्रथम संस्करण, दिसम्बर १६४० [ विज्ञान परिषद् प्रयाग से ] द्वितीय संस्करण, मई १६८३ (स्वाध्याय संस्थान से) मूल्य रु० ४०.०० मुद्रक सरयू प्रसाद पाण्डेय नागरी प्रेस, अलोपीबाग, इलाहाबाद प्रस्तावना डॉ० रत्नकुमारी स्वाध्याय संस्थान की ओर से प्राचीन वाङ्मय के कई ग्रन्थ प्रकाशित किये जा चुके हैं—स्वामी सत्यप्रकाश और डॉ० उषा ज्योतिष्मती के ग्रन्थ, जैसे बखशाली-मेनुस्क्रिप्ट, शुल्ब-सूत्र ( संस्कृत और अंग्रेजी में ) । इसी परम्परा में हम स्वर्गीय श्री महाबीर प्रसाद श्रीवास्तव के सूर्य-सिद्धान्त का विज्ञान भाष्य प्रकाशित कर रहे हैं। यह गौरव हमें विज्ञान-परिषद्, प्रयाग की उदारता से प्राप्त हुआ है, जिसके लिए हम परिषद् के अधिकारियों के उपकृत हैं । इस ग्रन्थ के प्रकाशन का व्ययसाध्य कार्य सम्पादित करना हमारे लिए कठिन होता यदि हमें करनाल के आदरणीय रायसाहब चौधरी प्रताप सिंह जी और उनके द्वारा स्थापित न्यास से आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई होती । चौधरी साहब के हम अत्यन्त आभारी हैं। हम प्रथम खण्ड मार्च १६८२ में प्रकाशित कर चुके हैं, जिसमें मध्यमाधिकार, स्पष्टाधिकार और त्रिप्रश्नाधिकार हैं । इस दूसरे खण्ड में ११ अध्याय हैं । इस प्रकार कुल १४ अध्यायों में पूरा सूर्य-सिद्धान्त समाप्त हुआ । एस० रंगनायकी, १० मई, १६८३. एम० एस-सी०, डी० फिल, डी० एस-सी० निदेशिका