भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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४४२ सूर्य-सिद्धान्त

हां, यदि वस्तु दीपक से बड़ी हो तो गहरी छाया दीवाल पर सदैव पड़ेगी । दीवाल के जिस भाग पर गहरी छाया पड़ती है उस भाग पर दीपक के प्रकाश का कोई अंश नहीं पहुँचता परन्तु हल्की छाया में दीपक का प्रकाश कुछ न कुछ अवश्य पहुँचता है । यदि कोई कीड़ा दीवाल पर गहरी छाया में हो तो उसे दीपक बिल्कुल नहीं देख पड़ेगा परन्तु हल्की छाया में उसे दीपक का कोई न कोई भाग अवश्य देख पड़ेगा । इसकी परीक्षा यों की जा सकती है :— एक दीपक या लम्प जलाकर रख लो । थोड़ी दूर पर एक पेंसिल, गोली या ऐसी चीज़ जो दीपक से छोटी हो खड़ी कर दो या टाँग दो । कुछ और दूर पर एक पतला कागज़ हाथ में इस प्रकार थामो कि इस पर पेंसिल की गहरी और हल्की दोनों छाया पड़ें । गहरी छाया में सुई से एक छेद कर दो और इसी से देखो कि दीपक देख पड़ता है या नहीं । दीपक नहीं देख पड़ेगा । हल्की छाया में सुई से छेद करके देखो । दोपक का कुछ अंश देख पड़ेगा । रेखागणित से यह जाना जा सकता है कि गहरी छाया कहाँ पड़ेगी और हल्की छाया कहाँ पड़ेगी । इनके विस्तार आदि का पता लगाना भी गणित से सम्भव है । सूर्य, चन्द्रमा में ग्रहण कैसे पड़ता है यह जानने के लिए गहरी और हल्की छाया का गणित करना पड़ता है इसलिए इस पर अच्छी तरह विचार करना आवश्यक है । आगे गहरी छाया को केवल छाया और हल्की छाया को परिछाया कहा जायगा । मान लो र एक प्रकाशमान पिंड और च एक अपारदर्शक पिंड है । दोनों पिंड गोलाकार हैं । र से प्रकाश की किरणें चारों दिशाओं में फैलती हैं परन्तु जो किरणें च पिंड पर पड़ती हैं वे इसके आगे नहीं बढ़ने पातीं । इन दोनों पिंडों को सीधी स्पर्श करती हुई रेखाएँ खींची जायें तो वे त बिन्दु पर परस्पर मिलकर एक दूसरे को काटती हुई आगे बढ़ेंगी । आ त ई सूची (cone) के आकार का होगा । यही च पिंड से बनी हुई छाया की सीमा होगी । इसके ऊपर, नीचे, इधर उधर छाया नहीं पड़ेगी । (देखो चित्र ६०) । इन दोनों पिंडों को छूती हुई जो रेखाएँ ता बिन्दु पर मिलती हैं इनसे परिछाया की सीमा बनती है । यदि एक पट (पर्दा) छाया में इस प्रकार रखा जाय कि वह र, च पिंडों के केन्द्रों को मिलानेवाली रेखा से समकोण पर रहे तो इस पट पर छाया का जो वृत्त बनेगा उसका व्यास छ छा होगा और परिछाया के वृत्त का व्यास उ ऊ होगा जिसमें छाया का व्यास भी शामिल है (देखो चित्र ६१) । यदि उ छ खंड में किसी जगह प बिंदु पर एक छेद कर दिया जाय और इसी छेद से प्रकाशमान पिंड देखा जाय तो पिंड का वह ऊपरी भाग देख पड़ेगा जो पा बिन्दु के ऊपर है । यह पा बिन्दु प आ