सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रग्रहणाधिकार ४६१ चित्र ६६ चित्र ६६ चन्द्रमा और भूछाया का उस समय का चित्र है जब कि चन्द्रमा भूछाया से निकटतम अन्तर पर रहता है अर्थात् जब चन्द्रमा चित्र ६८ के फ बिन्दु पर रहता है और भूछाया छ पर । यह स्पष्ट है कि छ झ भूछाया का व्यासार्धं और च ज चन्द्रमा का व्यासार्धं है । चन्द्रमा का ग्रसित भाग ज झ के समान है । अब देखना है कि ज झ का परिमाण क्या है ? ज झ = छ झ - छ ज = छ झ - (च छ - च ज) = छ झ + च ज - च छ = म - श कोज्या ई यदि म - श कोज्या ई शून्य के समान हो अर्थात् यदि म = श कोज्या ई तो ग्रहण नहीं लगेगा क्योंकि चन्द्रमा भूछाया को स्पर्श करता हुआ निकल जायगा । ऐसी दशा में भूछाया के केन्द्र से पात का अन्तर छ प का परिमाण यों निकलेगा - यह प्रकट है कि कोण च प छ = इ, ∵ स्परे इ = च छ / छ प ∴ छ प = च छ / स्परे इ = श / स्परे इ परन्तु ऊपर मान लिया गया है कि म = श कोज्या ई