भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 514, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 514

चन्द्रग्रहणाधिकार ४८६ घटाने से पूर्णिमान्तकालिक राहु = ४ रा ३° ५३' = १२३° ५३' राहु से चन्द्रमा = २६८° ३४' - १२३° ५३' = १७४° ४१' आगे है । ∴ चन्द्र शर की ज्या = ज्या १७४° ४१' × ज्या ४° ३०' * / ३४३८ = ज्या ५° १६' × ज्या ४° ३०' / ३४३८ = ३१६ × २७० / ३४३८ = २५' ∵ पूर्णिमान्तकालिक चन्द्रशर = २५' यह शर क्रान्तिवृत्ति से उत्तर है क्योंकि राहु से चंद्रमा ६ राशि से कम है (स्पष्टा० श्लोक ७,) पूर्णिमान्तकालिक राहु = १२३° ५३' ” ” सूर्य = ११८° ३४' दोनों का अंतर = ५° १६' जो चन्द्रग्रहण की लघुतम सीमा ६° से कम है। इसलिए चन्द्रग्रहण अवश्य लगेगा। (चन्द्रग्रहणाधिकार पृष्ठ ४६३) चन्द्रग्रहणाधिकार श्लोक १, ३ के अनुसार सूर्यबिम्ब का स्फुट व्यास = ६५०० × ५७' २६" / ५६' ८" योजन चंद्र ” ” ” = ४८० × ८२३' / ७६०' ३५" योजन = ४८० × ८२३ / ७६०' ५८३ × १ / १५ कला = ३२ × ८२३ / ७६०' ५८३ कला = ३३·३१ कला श्लोक ४, ५ के अनुसार चन्द्रकक्षा में भूछाया का योजनात्मक व्यास = १६०० × ८२३ / ७६०' ५८३ - ( ६५०० × ५७' २६" / ५६' ८" - १६०० ) × ४८० / ६५०० योजन *चन्द्रमा का शर उसी प्रकार निकाला जाता है जिस प्रकार सूर्य की क्रान्ति स्पष्टाधिकार के २८वें श्लोक के अनुसार निकाली जाती है । ४° ३०' सूर्य-सिद्धान्त के अनुसार चन्द्रमा का परम शर हैं । ४