सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०४ सूर्य-सिद्धान्त चंद्रमा की मोक्षकालीन चरज्या = स्परे २५°२०' स्परे १४°२' = ·४७३४ x ·२४६६ = ·११८६३ ∴ मोक्षकालीन चरांश = ६°४८' ∴ मोक्षकालीन नतांश कोटिज्या = (कोज्या ५३°४२' - ज्या ६°४८') कोज्या २५°२०' कोज्या १४२° = (·५६२० - ·११८६३) x ·६०३८ x ·६७०२ = ·४७३७ x ·६०३८ x ·६७०२ = ·४१५४ ∴ मोक्षकालीन नतांश = ६५°२७' ज्या अग्रा = \frac{ज्या १४°२'}{ज्या ६५°२७' कोज्या २५°२०'} + कोस्परे ६५°२७' x स्परे २५°२२' = \frac{·२४२५}{·६०६६ x ·६०३८} + ·४५६८ x ·४७३४ = ·२६५० + ·२१६३ = ·५११३ ∴ अग्रा = ३०°४५' ∴ पश्चिम बिन्दु से चंद्रमा का मोक्षकालीन दिगंश = ३०°४५' दक्षिण ∴ स्परे (खउग) = अग्रा कोटिज्या x नतांश स्पर्शरेखा = कोज्या ३०°४५' स्परे ६५°२७' = ·८५६५ x २·१८६३ = १·८८१७ ∴ समप्रोतवृत्त का नतांश = ६२°१' ∴ ज्या (आक्षवलन) = \frac{ज्या २५°२०' ज्या ६२°१'}{कोज्या १४·२'} = \frac{·४२७६ x ·८८३०}{·६७०२} = \frac{·३७७८}{·६७०२} = ·३८६४ ∴ आक्षवलन = २२°५५' दक्षिण