सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६८ सूर्य-सिद्धान्त छ ल या छ ला = छ से चन्द्र केन्द्र के ध्रुवप्रोतवृत्त का लम्बान्तर (Perpen- dicular distance) ∠ उ च स = चन्द्रमा के उत्तर विन्दु से पूर्व की ओर स्पर्श विन्दु की दिशा ∠ ऊ चा म = चन्द्रमा के उत्तर विन्दु से पच्छिम की ओर मोक्ष विन्दु की दिशा च ध = स्पर्शकाल में चन्द्रबिम्ब के केन्द्र का ध्रुवांतर = ९०° - चन्द्रमा की स्पर्श कालिक क्रान्ति छ ध = भूछाया के केन्द्र का ध्रुवान्तर = ९०° -- भूछाया की क्रान्ति चा ध = मोक्षकाल में चन्द्रबिम्ब के केन्द्र का ध्रुवान्तर = ९०° - चंद्रमा की मोक्षकालिक क्रान्ति यह स्पष्ट है कि स्पर्श या मोक्षकाल में चन्द्रमा भूछाया के बहुत निकट रहता है और इन दोनों की दूरी च छ मानैक्यखंड के समान होती है जिसका परिमाण एक अंश के लगभग होता है इसलिए इसकी तुलना में चन्द्रमा या भूछाया का ध्रुवान्तर छ ध बहुत होता हैं। इसलिए छ ल, छ च या छ ला, छ चा धनु को सीधी रेखाएँ तथा गोलीय त्रिभुज च छ ल या चा छ ला को सरल त्रिभुज (Plane triangle) मान लेने में कोई हानि नहीं हो सकती । इसी तर्क से छ ध को ल ध के समान माना जा सकता है क्योंकि च ध पर छ ल लम्ब खींचा गया है । इसलिये यदि चन्द्रमा की क्रान्ति क और भूछाया की क्रान्ति का हो तो, च ल = च ध - ध ल = च ध - छ ध यदि चन्द्रमा और भूछाया दोनों की क्रान्तियाँ उत्तर हों तो, च ध - छ ध = (९०° - क) - (९०° - का) = का - क और यदि दोनों की क्रान्तियां दक्खिन हों तो, च ध - छ ध = (९०° + क) - (९०° + का) = क - का == - का - (- क) अर्थात् दोनों दशाओं में च ल का परिमाण जानने के लिए भूछाया की क्रान्ति से चन्द्रमां की क्रान्ति घटानी चाहिए । यह याद रखना चाहिए कि उत्तर क्रान्ति धनात्मक और दक्षिण क्रान्ति ऋणात्मक लिखी जाय । ∴ कोज्या उ च स = कोज्या ल च छ = च ल / च छ = (का - क) / मानैक्य खंड = (भूछाया की क्रान्ति - चन्द्रमा की क्रान्ति) / मानैक्य खंड