भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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ग्रहयुत्यधिकार ५६३ ज्या ग च ज्या ∠ ग गा च आयनवलन ज्या ――――― = ―――――――― = ――――――――― ज्या ग गा ज्या ९०° त्रिज्या ज्या ग गा × आयनवलन ज्या ∴ ज्या ग च = ―――――――――――――――― (१) त्रिज्या परन्तु ग च अहोरात्रवृत्त का खंड है और इसके सामने का कोण ध्रुव पर ग ध च के समान है जो विषुवद्वृत्त के स प खंड के समान है। इसलिए यह जानने के लिए कि ग च खंड कितनी देर में उदय होता है हमें स प खंड का जानना आवश्यक है जो इस अनुपात से जाना जाता है— ज्या ग च ज्या ग ध ज्या ग ध ――――― = ――――― = ――――― (२) ज्या स प ज्या ध स त्रिज्या परन्तु ग ध = ध स — ग स = ९०° — ग की क्रान्ति ∴ ज्या ग ध = ग की क्रान्ति कोटिज्या त्रिज्या × ज्या ग च ∴ ज्या स प = ―――――――――― ज्या ग ध त्रिज्या ज्या ग गा × आयनवलनज्या = ―――――――――――― × ――――――――――――――――― ग की क्रान्ति कोटिज्या त्रिज्या ज्या ग गा × आयनवलनज्या = ――――――――――――――――― ग की क्रान्ति कोटिज्या शर ज्या × आयनवलनज्या ∴ आयनदृक्कर्म = ―――――――――――――― क्रान्ति कोटिज्या इस क्रिया से स प का जो मान आवेगा वह कलाओं में होगा यदि ज्याओं और कोटिज्याओं की गणना भारतीय रीति से की जायगी। इसका अर्थ यह हुआ कि केवल आयनवलन के कारण ग का उदयकाल गा के उदयकाल से स प असुओं के समान आगे होगा। यदि यह जानना हो कि इतनी देर में क्रान्तिवृत्त का कौन सा खंड उदय होगा तो इसको १८०० से गुणा करके जिस राशि में ग्रह हो उसके लंकोदयासुओं से भाग देना चाहिए क्योंकि यह तो स्पष्ट ही है कि जब राशि के लंकोदयासुओं में राशि का ३० अंश या १८०० कला उदय होता है तब जितने समय में स प का उदय होता है उतने समय में राशि का कितना खंड उदय होगा। यही ग्रहच्छायाधिकार के श्लोक ४ का सार है। च छ की गणना समकोण गोलीय त्रिभुज च गा छ में गा च छ कोण समकोण है क्योंकि गा