भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ३६ ३१६७४५ सावन दिन बीते। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि सृष्टि के आदि से इतने मध्यम सावन दिन बीतने पर १८७६ वि० की मेष संक्रान्ति लंका में हुई। इसलिए जिस दिन मेष संक्रान्ति थी उस दिन की आधी रात तक के अहर्गण हुए ७,१४,४०,४१,३१,३२० । अब देखना चाहिये कि मेष की संक्रान्ति से कितने दिन पर बसंत पंचमी पड़ी । इसके लिए पहले यह जानना चाहिये कि मेष संक्रान्ति के दिन कौन तिथि थी । १ चान्द्रमास २९.५३०५८७६४६०७ सावन दिनों का होता है । इसलिए यदि मेष संक्रान्ति के अहर्गण को इतने सावन दिनों से भाग दे दिया जाय तो जो लब्धि आवेगी वह सृष्टि के आदि से मेष संक्रान्ति तक के बीते हुए चान्द्रमासों की संख्या होगी और जो शेष बचा है वह चालू चान्द्रमास के सावन दिन होंगे । इस शेष को यदि ३० से गुणा करके गुणनफल को चान्द्रमास के सावन दिनों से फिर भाग दिया जाय तो जो लब्धि आवेगी वह तिथियों की संख्या होगी । ऐसा करने से मेष संक्रान्ति के समय तिथि की संख्या १६५२५७६ आती है, जो पूर्णिमान्त गणना से वैशाख बदी २ और अमान्त गणना से चैत बदी २ होती है । अब यह जानना चाहिये कि वैशाख बदी २ से माघ सुदी ५ तक कितने सावन दिन बीते । इसलिए पहले यह देखना चाहिये कि इस समय में कितनी तिथियाँ बीतीं । वैशाख बदी ३ से माघ बदी २ तक ९ चान्द्रमास होते हैं, क्योंकि इस वर्ष कोई मलमास नहीं पड़ा, तथा माघ बदी ३ से माघ सुदी ५ के आरम्भ तक अर्थात् चौथ के अन्त तक १७ तिथियाँ होती हैं । इसलिए मेष संक्रान्ति से माघ सुदी ४ के अन्त तक ९ x ३० + १७ तिथियाँ अर्थात् २८७ तिथियाँ बीतीं । परन्तु ३० तिथियाँ = २९.५३०५८७६४६०७ मध्यम सावन दिन; इसलिए २८७ तिथियाँ = २८७ x २९.५३०५८७६४६०७ x १/३० = २८२.५०६२६१३५०७३६ = २८२.५१ सावन दिन स्थूल रूप से परन्तु मेष संक्रान्ति की अर्द्धरात्रि के अहर्गण = ७,१४,४०,४१,३१,३२० इसलिए सृष्टि से माघ सुदी ५ तक के अहर्गण = ७,१४,४०,४१,३१,६०२.५१ अर्थात् माघ सुदी ५ की पहली अर्द्ध-रात्रि तक ७,१४,४०,४१,३१,६०३ सावन दिन बीते; जो पहली रीति से निकाले गये अहर्गण से मिलता है। इस गणना के लिए दशमलव के ग्यारहवें स्थान तक के अंकों को लेना पड़ता है क्योंकि गुणक (सृष्टि से