भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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उदयास्ताधिकार ६६१

स्थानपंचांग का विवरणशुक्रास्तकालशुक्रोदयकालगुरु का अस्तकालगुरु का उदयकाल
काशीबालकृष्ण शास्त्री काज्येष्ठ शुक्ल १०, ८५<br>२६ मई १६२८ ई०अधिक श्रावण शु० १३, ८५; ३० जुलाई २८चैत्र शुक्ल ३, ८५ विक्रमीवैशाख शुक्ल ८, ८५ वि० २७
"विश्वपंचांग काशी विश्वविद्यालय काज्येष्ठ शुक्ल १०, २६ मईअ० श्रा० शु० १३; ३० जुलाई२४ मार्च १६२८ ई०<br>चैत शुक्ल २, २३ मार्चअप्रैल १६२८ ई०<br>वैशाख शु० ८, २७ अप्रैल
लखनऊरामप्रसाद सिद्धान्ती का नवल किशोर प्रेस काज्येष्ठ शुक्ल २, २१ मईअ० श्रा० कृ० ३, ४ अगस्तचैत शुक्ल ४, २५ मार्चवैशाख शु० ७, २६ अप्रैल
औंधशास्त्रशुद्ध ऐक्य वर्द्धक पंचांगआ० कृ० ३,<br>६ जून<br>*अ० श्रा० शु० ११, २८ जुलाईचैत शुक्ल ३, २४ मार्चवैशाख शु० १, २१ अप्रैल
बागलकोटकेतकी पंचांग" "" "? ?वैशाख शु० १, २१ अप्रैल
पूनाचित्रशाला पंचांगआ० कृ० ३, ६ जूनअ० श्रा० शु० ११, २८ जुलाईचैत शुक्ल ३, २४ मार्चवैशाख शु० १, २१ अप्रैल

*यहाँ कृष्ण पक्ष पूर्णिमान्त गणना के अनुसार लिखा गया है, अमान्त गणना से यह ज्येष्ठ कृष्ण है जो महाराष्ट्र प्रान्त में प्रचलित है।