भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 703, कुल 838 में से

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पृष्ठ 703

६७८ सूर्य-सिद्धान्त उनका उदय समझा जाता है और इस समय यह सूर्योदय के पहले पूर्व क्षितिज में पड़ते हैं। यह पहले ही कहा जा चुका है कि नक्षत्रों की क्रान्ति नहीं बदलती इसलिये इनका कालांश जानने के लिए केवल आक्षदृक्कर्म संस्कार की आवश्यकता होती है। अभी बतलाया गया है कि उदय अस्त का गत-गम्य दिन जानने के लिए सूर्य और ग्रह की कालगतियों के अन्तर से कालांशान्तर को भाग दिया जाता है। परन्तु नक्षत्रों में गति शून्य होती है इसलिए केवल सूर्य की गति से ही कालांशान्तर को भाग देने की आवश्यकता पड़ती है। कभी अस्त न होने वाले तारे— अभिजित्ब्रह्महृदयं स्वातीवैष्णववासवाः । अहिर्बुध्न्यमुदकस्थत्वाच्च लुप्यन्तेऽर्करश्मिभिः ।।१८।। अनुवाद—(१८) अभिजित्, ब्रह्महृदय, स्वाती, श्रवण, धनिष्ठा, उत्तरा भाद्रपद बहुत उत्तर में होने के कारण सूर्य के प्रकाश से नहीं छिपते । विज्ञान भाष्य—जब सूर्य इन तारों के विषुवांश पर या इसके निकट आता है तब उससे इनका अंतर उत्तर की ओर इतना अधिक होता है कि ये सूर्य के उदयास्त काल से इतना पहिले उदय या अस्त होते हैं कि देख पड़ते हैं इसलिए सूर्य के प्रकाश से यह कभी लुप्त नहीं हो सकते । यह बात ६७६ पृष्ठ की सारणी* से और भी स्पष्ट होती है :— इससे प्रकट है कि सूर्य की क्रान्ति केवल ब्रह्महृदय के सामने उत्तर होती है अन्यथा दक्षिण है जब कि तारों की क्रान्ति सदैव उत्तर है। ब्रह्महृदय और सूर्य का क्रान्त्यन्तर भी २३ अंश के लगभग है। अब देखना है कि काशी या प्रयाग में ब्रह्म- हृदय का चरकाल क्या है ? चरज्या = क्रान्ति स्पर्शरेखा x अक्षांश स्पर्शरेखा ∴ ब्रह्महृदय की चरज्या = स्परे ४५°५६' x स्परे २५°२५' = १.०३३१ x .४७५२ = .४९०६ ∴ चरांश = २९°२४' ∴ चरकाल = १ घण्टा ५८ मिनट के लगभग इस दिन सूर्य का चरकाल ४७ मिनट के लगभग होता है। दोनों की क्रान्ति उत्तर है। इसलिए ब्रह्महृदय का उदय सूर्योदय काल से १ घण्टा ५८ मिनट—४७

  • १६२६ के नाविक पंचांग के अनुसार
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