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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६८० सूर्य-सिद्धान्त मिनट = १ घण्टा ११ मिनट पहले होगा और इसका अस्त सूर्यास्त से इतना ही पीछे होगा इसलिए इस दिन ब्रह्महृदय प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय देखा जा सकता है। जिस दिन सूर्योदय काल में यह तारा पूर्व क्षितिज में लग्न होता है उस दिन तो इसका दैनिक अस्त सूर्योदय काल से १६ घण्टे के उपरान्त होगा जब सूर्य को अस्त होने में १४ घण्टे से अधिक नहीं लग सकता। इसलिए इस दिन भी यह सायं- काल में अच्छी तरह देखा जा सकता है। इसी प्रकार जिस दिन यह सूर्यास्त काल में पच्छिम क्षितिज में लग्न होता है उस दिन सूर्योदय से २ घण्टे से भी अधिक पहले उदय होकर लोगों को दर्शन देता है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि काशी प्रयाग के उत्तर के देशों में तो यह कभी अदृश्य नहीं हो सकता, हाँ उन स्थानों में जिनका उत्तर अक्षांश २० अंश से कम है, यह कुछ दिनों के लिए अवश्य अदृश्य हो जायगा इसलिए यह जगन्नाथ पुरी में प्रत्येक दिन देखा जा सकता है परन्तु बम्बई में नहीं। शेष तारों में श्रवण ऐसा तारा है जिसकी उत्तर क्रान्ति बहुत कम है। इसलिए देखना चाहिये कि इसके लिए यह नियम कहाँ तक ठीक है। काशी प्रयाग में श्रवण का चरकाल = १७ मिनट के लगभग ,, सूर्य का चरकाल = ४३ ,, ,, दोनों की क्रान्ति भिन्न हैं इसलिए इस दिन सूर्योदय से १७+४३ मिनट = १ घण्टा पहले श्रवण का उदय होगा। परन्तु श्रवण का कालांश ५६ मिनट है इसलिये यह अच्छी तरह देखा जा सकता है। परन्तु काशी प्रयाग के दक्षिण के देशों के लिए यह नियम लागू नहीं हो सकता। इसी प्रकार अन्य तारों के बारे में भी जाना जा सकता है। इस प्रकार उदयास्ताधिकार नामक ६वें अध्याय का विज्ञान भाष्य समाप्त हुआ ।