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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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ज्योतिषोपनिषदध्याय ७८७ सारणी को ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि जहां १२ लिखा हुआ है वह मध्याह्न काल सूचित करता है । इसके बाद वाले खाने में नीचे १ और ऊपर ११ लिखे हुए हैं। इनका अर्थ यह है कि सूर्य का नतांश ११ बजे जितना होता है उतना ही एक बजे होता है। परन्तु मध्याह्नकालिक नतांश से इनमें अधिक अन्तर नहीं रहता। जनवरी और दिसम्बर में तो यह अन्तर सवा दो अंश से अधिक नहीं होता । फरवरी और अक्टूबर में यह २।। से अंश तक हो जाता है। मार्च और सितम्बर में ४। के लगभग हो जाता है। अप्रैल और अगस्त में ६।। अंश और मई, जून, जुलाई, अगस्त में इससे भी अधिक हो जाता है। इसलिये इस धूप घड़ी से जाड़े के दिनों में ११ बजे से १ बजे तक का समय बहुत शुद्धता के साथ नहीं जाना जा सकता। एक बजे से २ बजे तक या १० बजे से ११ बजे तक का समय सुगमता से जाना जा सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य कालों में समय का ज्ञान बहुत हो सूक्ष्मता के साथ किया जा सकता है। काल-समीकरण—धूप घड़ी से जो समय आता है वह शुद्ध स्थानीय काल होता है। तार घर की घड़ी से जा समय जाना जाता है वह इससे भिन्न होता है। स्थानीय-काल से तार घर की घड़ी का समय जानने के लिये स्थानीय-काल में २ संस्कार करने पड़ते हैं। एक को काल-समीकरण और दूसरे को देशान्तर-संस्कार कहते हैं। काल-समीकरण पहली जनवरी से १६ अप्रैल तक धनात्मक होता है, इसके बाद १४ जून तक वह ऋणात्मक रहता है। १४ जून के बाद फिर धनात्मक हो जाता है और अगस्त तक ऐसा ही रहता है। सितम्बर से दिसम्बर तक प्रायः ऋणात्मक रहता है। जब धनात्मक रहता है तब धूप घड़ी के समय में इसे जोड़ना पड़ता है और जब ऋणात्मक होता है तब घटाना पड़ता है। यह संस्कार करने पर शुद्ध स्थानीय-काल मध्यम स्थानीय काल के समान हो जाता है। देशान्तर संस्कार—मध्यम-स्थानीय काल जान लेने के बाद यदि अपना स्थान ८२।। अंश की देशान्तर रेखा से १ अंश पूर्व हुआ तो ४ मिनट, २ अंश पूर्व हुआ तो आठ मिनट और दस अंश पूर्व हुआ तो ४० मिनट घटाना पड़ता है। परन्तु यदि अपना स्थान ८२।। अंश की देशान्तर रेखा से पश्चिम हुआ तो उसी हिसाब से जोड़ना पड़ता है। ऐसा करने से जो समय आता है वही तारघर या रेलघड़ी का समय होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त-काल—सारणी में सूर्योदय काल भी घण्टा मिनटों में दिया हुआ है। यदि सूर्योदय काल को १२ घंटे से घटा दिया जाय तो सूर्यास्त काल आ जायेगा। यह वह समय है जिस समय सूर्य के बिम्ब का केन्द्र क्षितिज पर