सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता
Sushruta Samhita
महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished872 पृष्ठ
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आरोग्यस्थानम्
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| क्रमिक | सर्गनाम | सर्गसं. | सर्गणां प्रकाराः | स्थानम् | विशेषः |
|---|---|---|---|---|---|
| मसिषम | सिन्धम | सैन्धम | असैन्धम | सिन्धिम | |
| ३२ | अंखौ | २ | ✿ | ||
| स्कंधवन्धनौ | स्तब्धवाहुता | ||||
| ३३ | अंसफलकौ | २ | |||
| संबद्धे | बहुस्वापशोषौ | ||||
| ३४ | नीले | २ | ✿ | ||
| ग्राहिता वा | |||||
| ३५ | मन्ये | २ | ✿ | ||
| ३६ | कुकटिके | २ | ✿ | ||
| ३७ | विधुरे | २ | ✿ | ||
| ३८ | फणौ | २ | ✿ | ||
| प्रतिबद्धौ अभ्यन्तरतः | गन्वाज्ञानम् | ||||
| ३९ | अपांगौ | २ | ✿ | ||
| बाह्यतः | आन्ध्यम् दृष्ट्युपघातो वा | ||||
| ४० | आवतो | २ | ✿ | ||
| ४१ | (४) रूजाकराणि | ||||
| कुचविरांसि | ४ | ||||
| ४२ | गुल्फौ | २ | ✿ | ||
| वा | |||||
| ४३ | मणिबन्धौ | २ |