भारतकोश
सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता

Sushruta Samhita

महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished872 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 872 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

३२

सुश्रुतसंहिता

विषयपृष्ठविषयपृष्ठविषयपृष्ठ
चार रसों के संयोग७६६षट्चषट्टितमोऽध्यायःकितने एकवाले, दो वाले अथवा
छ रसों का संयोग८००तंत्रयुक्ति अध्याय का व्याख्यान८०६तीन वाले८०९
स्वस्थवृत्त अध्याय का८०१३२ तंत्र युक्तियाँ८०६पथ्य रसों से अविकृत तीन
चिकित्सा प्रयोजन८०१तंत्र युक्तियों का लाभ८०६दोष८१०
जिस २ श्रुतु में जो २ दोषअधिकरण, योग, पदार्थ, हेतुर्थ,षोडश कलावाला पुरुष८१०
प्रकृपित होते हैं उन २उद्देश, निर्देश, उपदेश आदिसत्त्व, रज, तम के भिन्न प्रकार८१०
श्रुतुओं में वे २ रसके लक्षण८०७-८०९पृथक् रूप में वात, पित्त, कफ
देने चाहिये८०१-८०२षट्षष्टितमोऽध्यायःतीन दोषों में८११
भोजन के १२ विभाग८०४दोष भेदविकल्प अध्याय कादोष रक्तादि धातु आदि में
औषध के १० काल८०४व्याख्यान८०६मिलकर असंख्येय बनते हैं८१२
आहारकाल८०५रसभेदविकल्प में कहे ६२ भेदों मेंब्राह्म वचन८१२