भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

चन्द्र योग में सफल हैं, चरणदास कह शेष ॥

इडा स्वर या चन्द्र स्वर की दिशाएं हैं— दक्षिण और पश्चिम। पिंगला स्वर या सूर्य स्वर की दिशाएं हैं — पूर्व और उत्तर। इडा स्वर की लग्न हैं — वृष, सिंह, वृश्चिक, कुम्भ। पिंगला स्वर की मेष, कर्क, तुला, मकर और सुषुम्णा स्वर की मिथुन, कन्या, धनु और मीन हैं :-

सूर्य स्वरमेषकर्कतुलामकर
चन्द्र स्वरवृषसिंहवृश्चिककुम्भ
सुषुम्णा स्वरमिथुनकन्याधनुमीन

कर्क मेष, तुला, मकर चारों चरती राश।

सूरज सौ चारों मिलत, चर कारज प्रकाश ॥

मीन, मिथुन, कन्या, कहीं, चौथी औ धन मीन।

द्विस्वभाव का सुषुम्णा, मुरली सुत रणजीत।

वृश्चिक, सिंह, वृष, कुम्भ, युत बायें स्वर के संग।

चन्द्र योग को मिलत हैं, थिर कारज परसंग ॥

नक्षत्र

इडा स्वर के नक्षत्र ये हैं :-

अश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा मूल और पूर्वाषाढ़।

पिंगला स्वर के नक्षत्र ये हैं -

अश्विनी, भरणी, कृतिका, उत्तरषाढ़ अभिजित, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद रेवती और रोहिणी।