भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

स्वरों में अच्छे काम करने का वर्णन

चन्द्र-स्वर

चन्द्र-स्वर में वे काम करना चाहिए जो स्थायी हों और जिनमें कुछ परिश्रम और प्रबन्ध की आवश्यकता हो। जैसे—मकान बनाना, बाग लगाना, कुआँ खुदवाना, तालाब बनवाना, दूर देशों की यात्रा करना, नये आश्रम में प्रवेश करना, मकान बदलना, विवाह करना, आभूषण पहनना, सामान इकट्ठा करना, दान देना, औषधि खाना, हाकिम से मिलने जाना, व्यापार करना, मित्रों से मिलना, सवारी—हाथी घोड़े मोल लेना, दूसरों की भलाई करना, गाना, नाचना, बाजा बजाना, एक स्थान से दूसरे स्थान पर रहने जाना, पानी पीना, पेशाब करना, धन एकत्र करना, बीज बोना, विद्यारम्भ करना, घर की नींव रखना, गांव खरीदना, दुकान खोलना, किसी की सिफारिश करना, किसी देश पर अधिकार करना, दक्षिण या पश्चिम की यात्रा करना, प्रेम करना, प्रार्थना करना, राज पर बैठना और नौकरी पर पहले दिन जाना इत्यादि।

साथ ही तत्व का ख्याल भी रहे। यदि चन्द्र स्वर में जल या पृथ्वी तत्व चलता हो तो काम उसी क्षण पूरा होगा।

सूर्य-स्वर

सूर्य स्वर में इनसे भी कठिन कार्यारम्भ करने चाहिये। जैसे कठिन विषयों का पढ़ना, जहाज आदि पर बैठना, शिकार खेलना, ऊंचे मकान या सवारी पर चढ़ना, लिखना, लेन—देन करना, कुशती लड़ना, सोना, जुआ खेलना, समुद्र यात्रा करना, नहाना, भोजन करना, शौचादि को जाना, युद्ध करना, शस्त्र विद्या सीखना, बीमार का इलाज करना, स्वरोदय का साधन करना, शत्रु पर चढ़ाई करना या उसके घर जाना, किसी स्थान को गिरा देना, पूर्व और उत्तर की यात्रा करना, कर्जा देना या लेना इत्यादि इत्यादि।