स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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उदाहरण के लिए आज रविवार है, पहली ढाई घड़ी रविवार, दूसरी ढाई घड़ी शुक्र, तृतीय बुध इत्यादि।
कालज्ञान
मृत्यु के पूर्व ही मृत्यु का हाल मालूम करना असाधारण बात है। परन्तु स्वरोदय शास्त्र ने इस विषय के अनुभव से कुछ सिद्धान्त निश्चित किये हैं जिनसे मनुष्य बहुत पहले से ही अपनी मृत्यु का हाल मालूम कर सकता है। यदि आठ पहर तक दाहिना स्वर चले और स्वर न बदले, तो जानो कि मृत्यु तीन वर्ष के भीतर हो जावेगी। यदि १६ पहर तक दाहिना स्वर चले और बदले नहीं तो दो वर्ष जीवन के शेष समझो।
यदि तीन दिन और तीन रात बराबर दाहिना स्वर चले तो एक वर्ष जीवन का शेष है।
यदि सोलह दिन और सोलह रात दाहिना स्वर चले, तो एक मास जीवन शेष है। यदि एक मास रात दिन दाहिना स्वर चले तो दो दिन जीवन के बाकी हैं। यदि पाच घड़ी बराबर सुषुम्पा स्वर चले तो मनुष्य शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त हो। यदि मुंह से श्वास निकलने लगे, तो अधिक से अधिक चार घड़ी वह और जीवित रह सकता है।
यदि बायीं सांस चार दिन या आठ दिन या इससे अधिक चले तो अभी जीवन यात्रा लम्बी है— शीघ्र समाप्त न होगी।
रात को दाहिना स्वर और दिन को बायीं चले, तो मनुष्य दीर्घायु रहे। यदि रात को बायीं और दिन को दाहिना स्वर लगातार एक मास तक चले, तो मनुष्य ६ मास में भर जावे। यदि आकाश तत्त्व तीन रात और तीन दिन बराबर चले तो मनुष्य एक वर्ष में मर जावे।
तत्त्वज्ञान
तत्त्वों को वश में लाने से मनुष्य प्रकृति के गुप्त भेदों को भलीभाँति समझ सकता है और अपने जीवन को नियमित जीवन बना सकता है।