भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

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जिसका रंग पीला है। इसमें से मीठी वास निकल रही है—जो कि सब प्रकार की बीमारियों को दूर कर सकती है। इस समय (लै) का जप करो।

यदि वायु तत्त्व चल रहा हो, तो गोल आकृति का ध्यान करो जिसका रंग हरा है—जो तूफान में से पक्षी के समान ऊँचा उठता दिखाई देगा। इस समय (यँ) तत्त्व का जप करो।

इन तत्वों के साधने से मनुष्य को बड़ी भारी शक्ति प्राप्त हो जाती है। इन्हीं के बाद मनुष्य योग और स्वरोदय का सम्बन्ध समझ सकते हैं, इसकी स्वाभाविकता पर विश्वास ला सकते हैं।

स्वरोदय शास्त्रियों ने और शिवजी ने लिखा है कि आकाश तत्त्व जिसके वश में है—वह त्रिकालज्ञ हो जाता है। वायु से अति वली हो जाता है। अग्नि से गर्मी बरदाश्त कर सकता है। जल तत्त्व से पानी का भय नहीं रहता। पानी बरसा सकता है। पृथ्वी तत्त्व से स्वास्थ्य को बनाये रख सकता है।

कुछ समय अभ्यास करने से तत्त्व सिद्ध हो जाते हैं और फिर हमेशा के लिए ये अपने वश में हो जाते हैं। इनसे बड़े-बड़े काम निकाले जाते हैं।

प्रति दिवस तत्वोदय ज्ञान-तालिका

सूबुवृशु
पृथिवीजलअग्निपृथिवीवायुअग्निआकाश

विशेष—मंगल के दिन तिथि तथा दिन दोनों से विपरीत स्वर अर्थात् चन्द्र पहिले पहल चले तो अशुभ हो, गर्मी अधिक हो।