स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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काल बचावे की विधि। दो शुक्र लौ विचारतु रहे। जो दो शुक्र दाहिनों सुर होई। दो पहर रहे तो जानिये कै अलप है। और तीन शुक्र दाहिनों सुर तीन पहर चले तो काल आवै। और तीन महिला में सुर गुरु के दिना और शुक्र के दिना दाहिनों चले दिन रात तौ जानिये कि काल आया। तौ उपाउ करै। दोऊ सुरन में टैठों लगावे। मुख होइ कै राह स्वासा कढन दे। सुर में टैठा मजबूत लगावे और ऊँची जगह में चढ़ै उतरै। अटाटी के कूचै काल जहां हुमसे तौ भरुडुना खेलै चौरै मैं और न हुमसे तौ अपनी मूत सरीर में एलै सोठि पीपर सुहागौ मिलाइ और मिरच की नास देइ तै। तुरन्त हुमस जाइ। फिर न आवै प्रानी जीवै और चलत फिरत सुर की खबरि राखै तौ हारै नहीं। सब बातै जीतै। लोक नाथ की खबर सब जानी परै।
मनसा पूरन करै। देवता की सी मरजांद धै। सकल सिद्धि का दाता होई। चतुर विवक्षण होई। और कौन हू रोग सो मान सदवो होई। तो दोऊ सुरन में टैठा मजबूत कै दो पहर रहे। ते दिन उदैं में दो पहर लगाये रहै, और अन्न पानी कछु न देई। दिन में भूख प्यास लगै तो दूध पीवे देई। अदरक (आदो) खैवे को दे और कछु न देइ। सात दिना रोगी को कर्शेटा लिवाबत रहै। सात दिन सुरकाज तन करै। तो रोगी सुख पावे। सब रोगन से छूटै। अलफमे न मरे और काहू को असीस दैवा चाहे मैं बाई तरफ तत्त्व चले। चारि पहर तौ जानियै कि रोग में परै। बचाये चाहे तो रोगी की घरी घरी कर्शेटा लिवाबत रहै। अन्न पानी कछु न देई। जब कुछ मागे तो गाई का दूध देई पीवे को तो अच्छा होई।
शुक्र के उदय में अग्नि तत्त्व चले चारि पहर तौ जानिये कि पुत्र लाभ होई। राजा सन्मान करै बड़ा आनन्द होई चन्द्र के दिना सुरज, सूरज के दिना चन्द्र। आठ दिना लो अदल बदल रहै तो अशुभ देखै। तौ जिमी छांड़ि देई अंत जाय रहै तो बचै तब सुर धरु वाघै। जब धर आवै तब मन में सुर फिरै।
फौज की लड़ाई की विधि
लड़ाई पै जब ठड़ा होई तब दिसा को विचार करै। दाहिनों सुर चलता