स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञान)
विलबु कहिजै।
अथ वायु तत्व
मुखतै पूरे अछिरक है। सुरज सुर होई तो कारजु सिद्धि होई। जो सरीर पांच तत्व कौ है सो तेह तत्व में जानि अत है।
पृथ्वी तत्व - सुर में पीत वरन है। चौकोनी। मीठी स्वाद है। पूर्व दिसा वैस वरन। माझनासा बहै अंगुर १२।
जल तत्व - सफेद वरन। गोल मूरत। खारी स्वाद। पछिम दिसा ब्रह्मन वरन। अधोगति सुर वहै, अंगुर १६।
अग्नि तत्व - रक्त वर्ण। त्रिकोन मूरति। चिरपिरो स्वाद। दछिन दिसा। छत्रीवरन। ऊचौ सुर वहै, अंगुर ४८।
वायु तत्व - हरौ वरन। खाटौ स्वाद। लव मूरति। उत्तर दिसा। सुद्र वरन। टेढौ सूत्य जानिजै।
दौऊ बहै तौ दो बालक जानिजै। सुरन सुर होई तौ कन्या जानिजै। अग्नि में गर्भ पतन जानायै। आकास में मृतक जानीजै।
अथ संवत्सर को प्रश्न
चैत्र सुदी परवा के दिन उदय होइ ता समय पदम आसन बैठे, पछिम मुख करकै। उदय होइ सूरज कौ तब पृथ्वी तत्व बहै तो अन्न बहुत होई। पानी नीकौ होइ। मानिषु निरोग होइ। देश विदेस आनन्द बहुत होई। राजा प्रजा सुखी होई।
बरस दिना कौ आगुमनि सुजै जलु तत्व होई तो जलु बहुत होई। मनुष निरोगी होई। अनस्यारी यान उनाहरी बहुत होइ। उपद्रव होइ तेज बहुत। अग्नि बहुत लगै। जलु थोरी होई। लराई राजा प्रजा की होय। अन्न कौ रोगु लगै। जैसी अगिमु बरस कौ जाने अरु युद्ध बलवा अधिक होई। मरही बहुत होई।
अरु वायु तत्व उदौ होइ मुसौ बहुत लगै। बैहर चले। या टाड़ी आवै।