स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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मेघ थोरी बरसै। वायु की पीड़ा अधिक होई। सीतांग अग्नि थोरी जागा में उपद्रव होई।।
आकास तत्व होई तो मेघ बहुत बरसै। पानी की अधिकाई सों अन्न महागी होई। मरही लगी। उपद्रव होई। अन्न की सैन होई। जौं सुन्नसुर होई तौ जागा छूटै। राज छूटै। आयु ना रहे।
मेघ संक्रांति के दिन तत्व विचारे एही प्रकार के। जो सुभ तत्व बहै तो कछु शुभ होई के अत्यधिक निषिद्ध फल होई।
प्रश्न घाउ की जो कोउ पुछै कै वाकै घाउ लगौ है ताहां अग्नि तत्व होई तौ काँधे में कहिजे। वायु तत्व होई तौ पैर में कहिये। आकास तत्व होई तौ माथे में कहिये। जल तत्व होई तौ पांउ में कहिये। सुन्नसुर होई तौ अंग में बताइये।
कोऊ अपनी कारजु पूछै— जो पृथ्वी तत्व होई तौ लाभु होइ झेल सौ। जल तत्व होई तौ तनु लाभु होई। अग्नि तत्व होइ कै वायु तत्व होई तौ हानु होई। आकास निरफल है।
जल तत्व होई तो वेग आवे। पृथ्वी तत्व होई तो नीको जानिअै। लाभु कहिये।
उहाँ है ठिकानै। वायु तत्व होई तौ राह में बताइये। अग्नि तत्व होई तौ रोगी जानिये। रोगी को परसग पूछै तौ पुरन सुर होई तौ जीवै। सुन्न सुर हो पुछै तौ मीचु जानिये। तौ महादेव रक्षा करे तोलौ मरै।
पुछत सुन्न होई, पाछै पुरत होई, तौ जमु आवै। अनेक रोग होई तो लगि जीवै। एक दिना सुरजा वहै कै चन्द्र बहै एक रात बहै तौ तीन बरस में मरै। दो दिन दो रात एक सुर बहै तौ एक बरस जीवै। विसन पट्ट का अरु धरती युव हो न देखै तो छै महिना जीवै। छाया दरपन में सिर नहीं देखै, तो पंद्रह दिन जीवै। भीहै न देखै तौ नौ दिन जीवै। मात्र मंडल न देखै तो सात दिन जीवै। तारा न देखै तौ पाँच दिन जीवै। जीभ न देखै तौ एक दिन जीवै।
ये तत्व जानाति योगी ये पठति नित्यस्व।