भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

मुच्यते सर्व पापेभ्यो लभ्यते वाञ्छितं फलं।

जो याही पौने अभ्यास करे या को निति पाठन करै ताके सब पापु छुटै, मनि वाञ्छित फल पावै।

रविवार को पृथ्वी तत्व होइ उदै में बुद्धवार को प्रथवी तत्व होई। मंगल वा सुक्र को अग्नि तत्व होई सुरज के उदै बृहस्पत को वायु तत्व होई। सनीचर को आकास तत्व को उदै होई।

प्रथम आकास है पाछे वायु है ता पाछे अग्नि है, चौथो जल तत्व है पाँच पौ प्रथी तत्व है एक-एक घरी की मरजादा क्रम तै है। जाहिन जोत पगै तातै घरी-घरी तत्व लीजें छापा प्रमान हारी घरी की छाया पाँउ।

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आकासवायुअग्निजलप्रथीतत्वप्रभा
१६न.
१७
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अथ स्वासन की मरजादा

डोक नाड़ी पांच घरी प्रभात छुपतर संध्या चंद्रमा के उदै में आप छाया देखै निमषन लागै। छाया गरे में छिन मात्र देखै। मन थीर करकै ता पाछे ऊँची आप परेरै। आसा मिक्षित सुपेत काल पुरुष है तासीं छा प्रान की है ताके मुख में तीन लोक हैं कान न देखै तौ वरष १२ जीवै, २ हातन देखै तौ वरष दस जीवै, १० मुखन देखै तौ वरष १ जीवै।