भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(४५)

॥ श्री गणेशायनमः॥

अथ दीपक-ज्ञान-स्वरोदय

(ऋषीकेश कृत)

॥ श्री गणपति स्तुति ॥

दुरद वदन सुख सदन विराजत । ईस तनय गनईस सीस रजनीस जु छाजत । सिद्धि सिद्धि बुधि देत जाहि कछु विलम न लागै । जो सुमिहै चितलाइ भागि ता जन कौ जागै । रिषीकेस कलिमल दलन विथन विनासन अघहरन । जै गिरिजा नंदन परम गुर, काम धाम मंगल करन ।

अथ नूतक छंद

आदि धरौ ध्यान सुखद स्याम कौ । मोहि भरोसी जुहै उनिही के नाम कौ । प्राण सकल प्राणनि कौ जानियै । देवनि कौ देव सोइ मानियै । मैं कौ हरण हार है भगवंत सौ । आदि वही मध्य वही अंतसौ । वारन की तारन की बार उन । वेस्या अजामेर लियौ तारि उन । द्रौपती कौ चीर बढ़ायौ उनहीं ।

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