स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञान)
अब इक इक के काजहि वरनौं, सुनि राखौं मन मांही । जाकौ काज ता समय कीजै, सिद्धि सकल विधि लहियै । अपजोगनि की कछु न वस्याई, जो स्वर मारग चलियै । भाषा रिषीकेस कृते नाड़ी-स्वर भेद वर्णनानाम प्रथमोप्रकासः ॥१॥
इति श्री भाषा स्वरोदये ज्ञान दीपकं उमा महेश्वर संवादं ।
द्वितीय प्रकास
स्वर-कार्य-वर्णन
दोहा
अब हरिगीता छन्द करि, कहियत दुतिय प्रकास । एकए स्वर के काज सब, भाषे सिव सुखराम ।
हरिगीतिका छन्द
जेकाज ससि स्वर मध्य सूभ, तिनो को सुनौ चितलाइ जू । कबहू न निर्फल होहि जे, निश्चये सदा फलदाइ जू ।
अथ चन्द्र-स्वर
जात्रा, विवाह, सुदान भूषण, वसन, ससि सुभ जानियै । पुनि सांति पौष्टि सुमित्र दर्शन स्वामि कौ सनमानियै । कहि बंज अरु धन, बहुरि रस कौ सार संग्रह कीजियै । तहा जानि ग्रह परवेस शुभ, पुनि बीज खेतहि दीजियै । सुभ मंत्र-साधन जज्ञ विद्या, सुर प्रतिष्ठा जानियै ।