भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

जो पिय करै तौ त्रिय वस्य होई, जो त्रिय करै तौ पि यवस्य सोई। जो चाहियै हेतु काहू सों कीजै, भाषों सुनौ ताहि सो जानि लीजै लै चन्द्र नाडी दिन सात ताई, लै अंजुली नीर भू में सु नाई। ताको धरै ध्यान जो चित भावै, गुर ज्ञान पूरौं सु ऐसै बतावै। निज स्वास जानौ नीचे को थीवै, सो नीर गौरी तिहि काल पीवै। तौ प्रीति वाढ़ै कछु संस नाँही, यों साचु मानौ निज चित माँही। औरौ कहौ जू हित वृद्धि रीती, जासों बढ़ावै अनजान प्रीती। चमेली डारी सप्तांगु लीजै, ज्ञानी बतावै सो चित दीजै। लै नाम ताको विधि आन छाड़ै, ताके तरै देहरी ताहि गाड़ै। जो चंद जानौं निजु स्वास माही, तौं यौं करै जू कछु संसै नाही। सो आप ही सों प्रीतिहि लगावै, यों गुर बखानै जो चित भावै। यह कोई जानै जो चित्तई लहै जू, काहू को प्यारी आपै रहे जू। जो हौं कहौजू काजहि करै सो, सोक आपने जीयको तो हरै सो। भानोदये चंद्र नाडी जु जानौं, सैमरि चमेली कौ मूल आनौं। ले खेर हू की चौथी तिलनु की, है पांचई सो जानौं चंदन की। लै कै इनै पांच खूटी गढ़ावै, पांचों को गाड़ै जहां भूमि पावै। चारौ चहू दिसि तिल मध्य कीजै, जी भावतौ जो तेहिनाम लीजै। चारंगुली ते भुव मध्य राखै, औरु करौ जू गुनि लोइ भाखै। लै सूत की जसुनि तार नीकी, कातै जु कन्या भावत जी की। खूटी जु गाड़ै तिनि मैं लपेटे, मन में जु इच्छा सो ताहि भेटै। तारे लपेटै जेहि काल जोई, या भांति भावै तेहि काल सोई। ताके हिये में सो होइ प्यारी, जो लोई ज्ञानी सोई उचारों।

इति वसीकरण - विधि

अथ डर कौ उपाय

काहू सौ कोउ मन मैं डरै, जू ताको बतावौं सु या विधि करे जू।