स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञा)
(स्वरो)
इति अनुग्रह -वि
अथ आप-विधि
काहू जु चाहै आपहि दियै जू तौ चाहियै मीत ऐसे कियै जू। जो सूर्य कौ वार सो भौम जानौ, भानोदये स्याम पाखै जु मानौं। उदैं विंब रवि कौ सुनीकैं दिखाई, है पिगिला मै तेहि काल बाँई। जिहि आप दीजै सौ सर्व लागै, सब सुख जानौ तासौं सु भागै। जो साध जग में आपै सुनाई, कीजै अनुग्रह धरि चित माहीं। जी में बिने वासों मानि लीजै, कीजै अनुग्रह आपै न दीजै। काहू जु आपौं सो नीचे जानौं, साधू सुनौ जू यह बात मानौं। है रामजी की तुम कौ दुहाई, आपौं त काहू यह बुद्धि पाई। श्रीराम करेंगे सभी न्याउ तेरौ, ताही के हाथै सब कौ नवेरौ। आपहि देह तौ तुम सोचि लोजौ, जामेभलौं है तुम चित दीजौ। इति श्री महा स्वरोदये ज्ञान दीपके उमा महेश्वर संवादे भाषा। रिषीकेश कृते रतित्यादि विधि वर्णनानाम चतुर्थो प्रकास ॥४॥
पंचम - प्रकाश
काल-ज्ञान-वर्णन
दोहा
छन्द भुजंग प्रयात करि, पंचम कहौ प्रकास। काल ज्ञान जामै कहौ, सुनौ सकल सुखरास। आये काल काहा करै, सुनौ सकल तुम सोइ। आयु बढ़ै जाकैं कियै, जोगी स्वर मुनि लोइ।
छंद भुजंग प्रयास
चतुर्भाति जानौं हियै काल ज्ञानौं।