भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

गगन मंडल में ससी सूर्य जीनों । सुलीला सरूपी जियै साधु तो लौ । जियै साध साधै जु है सिद्ध जानों । करै तो परम पद लहै सांचु मानों ।

इति काल कौ उपाइ

कहें पंच परकास में काम जेतै । बिना साधना सो नहीं सिद्ध तै तै । छटै में कही साधन रीति या तै । जु चाहौ कि साधै लहौ सिद्धि ता तै । उमा गुप्त ही सो प्रगट में सुनाई । हियै समझिले बात मन में जु आई ।

इति श्री महास्वरोदये ज्ञाना-दीपके उमा महेश्वर संवादे ।

भाषारिषीकेस कृते काल ज्ञान वर्णनोनाम पंचमो प्रकास । ॥५॥

षष्ठम-प्रकाश

योग-साधना-विधि

दोहा

षष्ठम कहौ प्रकास में, लियौ चौपही रीति । जहा साधना जोग की, किहि विधि, सुनियै मीत ॥

चौपाई

द्वौ मारग जग भीतर जानों, मित्र प्रवृत्ति निवृत्ति बखानों । जे प्रवृत्त माया में बहैं, जे निवृत्त तीरहि लगि रहैं । सिद्धि सिद्धि नव निद्धि जु चाहै, इनि ही के हित कष्ट निवाहै । तिनि जन पूरन ज्ञान न पायौ, नट ज्यौ नाचौ जगत रिझायौ । सो उपाइ ज्ञानी किनि करै, जासे भव सागर कौ तिरै ।